Saturday, 23 March 2013

कोर्ट नहीं पहुंचे सलमान: छह साल के लिए जेल जा सकते हैं सैफ, नीलम, तब्‍बू और सोनाली बेंद्रे


 संजय दत्‍त के बाद आज सलमान खान, सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे, तब्बू व नीलम के खिलाफ अदालती कार्यवाही चली। सलमान को छोड़ कर सभी सितारे शुक्रवार को ही जोधपुर पहुंच चुके थे। सलमान खान इलाज के लिए अमेरिका में होने के चलते नहीं आए। कोर्ट ने इन सितारों के खिलाफ आईपीसी की धारा 149 और वन्‍य जीव संरक्षण अधि‍नि‍यम की धारा 9/51 के तहत आरोप तय कि‍ए। इस मामले में तीन से छह साल की सजा का प्रावधान है। सभी सितारों ने आरोपों से इनकार किया। अब कोर्ट में गवाहों को बुलाने की प्रक्रिया शुरू होगी। 
 
सलमान को छोड़ सभी सितारों को एक-एक करके कोर्ट में बुलाया गया और इन पर लगे आरोप पढ़ कर सुनाए गए। इन पर शिकार करने, शिकार में मदद करने और शिकार करने के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए हैं। मामले की सुनवाई अब 27 अप्रैल को होगी। सलमान के वकील ने बताया कि कोर्ट में अर्जी दी गई कि सलमान खान का अमेरि‍का में इलाज चल रहा है और डॉक्‍टरों ने उन्‍हें 22 अप्रैल तक कहीं जाने से मना कि‍या है। इस आधार पर सलमान खान की अर्जी मान ली गई। उन्‍होंने बताया कि कोर्ट ने कहा है कि वह अगली पेशी में कोर्ट में हाजि‍र हो सकते हैं। कोर्ट जब भी सलमान खान को बुलाएगी, वह अवश्‍य आएंगे। 
 
राजश्री प्रॉडक्शंस की फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान 1 और 2 अक्टूबर, 1998 की दरम्यानी रात बॉलीवुड सितारे सलमान खान, सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे, तब्बू व नीलम द्वारा स्थानीय सहयोगी दुष्यंत सिंह के साथ कथित रूप से कांकाणी की सरहद पर दो काले हिरणों के शिकार के मामले में शनिवार को आरोप सुनाए जाएंगे। इसके मद्देनजर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (जोधपुर जिला) चंद्रकला जैन की अदालत में इन सितारों को शनिवार सुबह 10 बजे मौजूद रहना है। 
 
शिकार की घटना के बाद अदालत ने 20 फरवरी 2006 को आरोप तय किए थे। आरोपी फिल्मी सितारों ने इसे सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी, जबकि राज्य सरकार की ओर से कुछ और धाराएं जोडऩे के लिए हाईकोर्ट में निगरानी याचिका पेश की गई। इस पर हाईकोर्ट ने 24 जुलाई, 2012 को आरोपियों को पुन: संशोधित आरोप सुनाए जाने के आदेश दिए। आरोपियों को बीती 4 फरवरी को जोधपुर की अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना था, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। 
 
लगी धाराएं 
 
सलमान खान : वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 
सैफ अली खान, नीलम, तब्बू, सोनाली बेंद्रे व दुष्यंत सिंह : वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51, विकल्प में धारा 52, सपठित धारा 149 आईपीसी। 

शहीदे आजम भगत सिंह और क्रांतिकारियों के जीवन की कुछ खास बातें


23 मार्च, 1931। इसी दिन भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी से लटका दिया था। इस घटना ने पूरे देश को हिला डाला था। भगत सिंह और उनके साथियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमा था और इंकलाब-जिंदाबाद का नारा बुलंद करते हुए देश की आजादी के लिए आपनी जान कुर्बान कर दी थी। भगत सिंह ने एक नारा दिया था-‘इंकलाब-जिंदाबाद’। (जानिए, गायत्री मंत्र का जाप करने वाले भगत सिंह नास्तिक कैसे बन गए)
फांसी के फंदे से झूलने के पहले भगत सिंह ने जेल की कालकोठरी से अपने साथियों के नाम एक खत लिखा था - ‘देश और इंसानियत के लिए जो कुछ हसरतें मेरे दिल में थीं, उनका हजारवां हिस्सा भी मैं पूरा नहीं कर पाया। अगर जिंदा रह सकता तो शायद इनको पूरा करने का मौका मिलता और मैं अपनी हसरतें पूरी कर सकता। इसके सिवा फांसी से बचे रहने के लिए कोई लालच मेरे दिल में  कभी नहीं आया। मुझसे ज्यादा खुशकिस्मत कौन होगा? आज मुझे अपने आप पर बहुत नाज है। अब तो बड़ी बेताबी से आखिरी इम्तेहां, अंतिम परीक्षा का इंतजार है। आरजू है कि यह और करीब हो जाए। युवाओं के बीच उनकी जेल डायरी भी बड़े उत्साह से पढ़ी जाती है।
भगत सिंह का नाम देश का बच्चा-बच्चा जानता है। दुनिया के महान क्रांतिकारियों में उनका स्थान अग्रणी है। वे युवाओं के आदर्श हैं। बचपन से ही उनके कदम अंग्रेजी शासन के खिलाफ चल पड़े थे। भगत सिंह उन चुनिंदा क्रांतिकारी शख्सियतों में से हैं जिन्हें दुनिया भर में क्रांति का आदर्श माना जाता है, लेकिन इसी भगत सिंह पर पाकिस्तान को फख्र नहीं है।
अक्सर, क्रांतिकारियों के बारे में लोग सोचते हैं कि वे मानो अवतार होते हैं। आम लोगों से एकदम अलग होते हैं, पर ये एक गतलफहमी है। वे भी हाड़-मांस के जीते-जागते इंसान होते हैं। आम इंसानों जैसे ही होते हैं महान क्रांतिकारी, बेशक  इस मायने में अलग होते हैं कि अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करते और अपनी बेशकीमती जिंदगी को कुर्बान करने में जरा भी नहीं हिचकते।
आज शहादत दिवस के मौके पर dainikbhaskar.com भगत सिंह और उनके साथियों के रोजमर्रा के जीवन के कुछ ऐसे पहलुओं को सामने ला रहा है, जिनके बारे में लोग शायद ज्यादा नहीं जानते। सभी तस्‍वीरें मुक्ति मार्ग ब्‍लॉग से ली गई हैं। 

चाय-नाश्‍ते के बाद पांच घंटे मजदूरी करेंगे संजय दत्‍त, महीने में मिलेंगे 1200 रुपये


फिल्म के लिए करीब 3 से 5 करोड़ रुपए लेने वाले बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की सालाना कमाई जेल जाने के बाद 20 करोड़ रुपए से घट कर करीब 10 हजार रुपए पहुंच जाएगी। शुरुआती छह माह तक जेल में वह रोजाना अधिकतम 40 रुपए कमा सकेंगेयानी महीने में करीब 1200 रुपए। यह राशि उन्हें जेल में छोटे-मोटे काम के रूप में मिलेगी।

संजय दत्‍त को किस जेल में रखा जाएगा, इसका फैसला बाद में होगा। लेकिन यदि उन्‍हें जेल होती है तो उन्‍हें सुबह साढ़े सात बजे तक उठ जाना होगा। चाय और नाश्‍ते के बाद उन्‍हें पांच घंटे मजदूरी करनी होगी। इसके बाद दोपहर में उन्‍हें खाना मिलेगा। कुछ देर आराम करने के बाद उन्‍हें फिर से मजदूरी करनी होगी। यह सब संजय दत्‍त को जेल में बंद अन्‍य कैदियों के साथ करना होगा। फिल्मों में गांधीगीरी करने वाले मुन्ना भाई को जेल में बढ़ईगीरी करनी पड़ सकती है। उन्‍हें कैदियों वाले कपड़े मिलेंगे। इनमें कुर्ता-पायजामा और टोपी शामिल है। इसके अलावा, उन्‍हें दो कंबल, एक चटाई, एक तकिया व चादर मिलेगी। फर्श पर सोना होगा। संजय दत्‍त घर से बने खाने के लिए तरस जाएंगे। इतना ही नहीं, संजय दत्‍त 15 दिन में सिर्फ एक बार अपने परिवार और वकील से मिल पाएंगे।


वहीं, अवैध रूप से घातक हथियार रखने के जुर्म में सुप्रीम कोर्ट से पांच साल की सजा पा चुके बालीवुड अभिनेता संजय दत्त की सजा माफी के लिए मुहिम छिड़ गई है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस (रिटायर्ड) मार्कंडेय काटजू की महाराष्ट्र के राज्यपाल से सजा माफी की अपील के बाद इस मुहिम में नेता, जज और उनके फैन्स भी शामिल हो गए हैं।